दिल के भीतर छुपी हुई नन्हीं बच्ची
फिर से गुड़िया का घर बनाती है
दोस्तों को न्यौता भेज कर
जल्दी-जल्दी में सब निपटाती है
उसका बेसब्र फ्रॉक हवाओं में फरफराता है
नन्हें हाथों से गुड़िया का घर सजाती है
फिर से गुड़िया का घर बनाती है
फिर से गुड़िया का घर बनाती है
दोस्तों को न्यौता भेज कर
जल्दी-जल्दी में सब निपटाती है
उसका बेसब्र फ्रॉक हवाओं में फरफराता है
नन्हें हाथों से गुड़िया का घर सजाती है
दिल के भीतर छुपी हुई नन्हीं बच्ची
आज बिन बात मुस्कुराती है
शर्म से गुलाबी गालों को
पोंछ-पोंछ कर सबसे गुपचुप छुपाती है
माँ की चुन्नी में लिपट कर, आईने से
बात करती है ढेरों गीत गाती है
दिल के भीतर छुपी हुई नन्हीं बच्ची
ज़माने को किनारे लगा कर
दिल की दुनिया से बाहर निकल आयी है
बंद रोशनदानों में रंग भर कर धनक के सारे
बेजान दीवारों पे गीत लिख आयी है
बेसबब फिरती है बेबात मुस्कुराती है
दिल के भीतर छुपी हुई नन्हीं बच्चीफिर से गुड़िया का घर बनाती है

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