प्यार में नींद की कई गोलियां डकार जाते हैं
शायद तभी
बहुत देर तलक बिस्तर पर पसरे रहते हैं
हम
नींद में अक्सर फिसल पड़ते हैं रास्ते
इसीलिए सुबह तक एक-दूजे को संभाल रखते हैं
लिहाफ की ठण्ड काफी नहीं
तो ओड़ लेते हैं
एक दूसरे की गर्मी
आँखों की नमी को चूम लेते हैं अक्सर दोनों
तो आँखें भी अमूमन गीली नहीं रहती
हाँ , जब सोते हैं तो आखें खुली रहती हैं
हमारे सपनें गालों पे बोसे लेते हैं
हमारे पाँव के तले बर्फ नहीं, घास जमती हैं
हम बोते हैं लम्हों के बीज
एक-एक लम्हा उगता है, पनपता, फलता-फूलता है
और फिर हम उनकी छाँव में
दोपहर की कड़ी धूप तले बैठते, बतियाते, ऊंघा करते हैं
हाथ की चाशनी में घोल कर
खिलाते हैं टुकड़ा-टुकड़ा
मिट्टी के घड़े का पानी पीते हैं
हम एक दूजे का हाथ नहीं, साथ पकड़ा करते हैं
इसलिए कभी
रिश्तों की भीड़ में गुम होने का कोई डर ही नहीं
वो पहचान लेता है मेरी आँखों का रंग
और मुझे भी तो उसकी नज़र की पहचान है ना !
तंगहाल सही
गृहस्थी मज़े से कट रही है अपनी
देखो ! तुम फिक्र बिलकुल भी न करना लेकिन
प्यार को हमारे नज़र मत लगा देना कहीं !
बहुत देर तलक बिस्तर पर पसरे रहते हैं
हम
नींद में अक्सर फिसल पड़ते हैं रास्ते
इसीलिए सुबह तक एक-दूजे को संभाल रखते हैं
लिहाफ की ठण्ड काफी नहीं
तो ओड़ लेते हैं
एक दूसरे की गर्मी
आँखों की नमी को चूम लेते हैं अक्सर दोनों
तो आँखें भी अमूमन गीली नहीं रहती
हाँ , जब सोते हैं तो आखें खुली रहती हैं
हमारे सपनें गालों पे बोसे लेते हैं
हमारे पाँव के तले बर्फ नहीं, घास जमती हैं
हम बोते हैं लम्हों के बीज
एक-एक लम्हा उगता है, पनपता, फलता-फूलता है
और फिर हम उनकी छाँव में
दोपहर की कड़ी धूप तले बैठते, बतियाते, ऊंघा करते हैं
हाथ की चाशनी में घोल कर
खिलाते हैं टुकड़ा-टुकड़ा
मिट्टी के घड़े का पानी पीते हैं
हम एक दूजे का हाथ नहीं, साथ पकड़ा करते हैं
इसलिए कभी
रिश्तों की भीड़ में गुम होने का कोई डर ही नहीं
वो पहचान लेता है मेरी आँखों का रंग
और मुझे भी तो उसकी नज़र की पहचान है ना !
तंगहाल सही
गृहस्थी मज़े से कट रही है अपनी
देखो ! तुम फिक्र बिलकुल भी न करना लेकिन
प्यार को हमारे नज़र मत लगा देना कहीं !

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