वो पल था
या कोई जादू था
किसी ने खुशियों के चूल्हे पर चढ़ाये सपने
ख्वाबों के पतीले को बराबर आंच देकर फूँका
धुआँ आँखों को ना चुभा बल्कि बादल बनकर
उड़ चला बारिशों के गाँव नए
गर्म लजीज़ दावतों की खुशबू का न्यौता लेकर
मन के जुगनू आँखों के बाहर उड़ आये थे
तुम थे सामने
और धडकनें जुबां पे अटकी थी
मैं जैसे एक पल बादल पर दूजे ज़मीन तले
शर्म से उड़ती जाती थी गड़ती जाती थी
बातें सबकी अगरबत्ती सी धुआं-धुआं होकर
दिल के दिल महकाती जाती थी
महक उठे थे अचानक रिश्ते
पल मुबारक हो चले आये थे
वो जब गाँठ लग गयी थी
तुड़ने को नहीं जुड़ने को
जब फेरों संग साथ-साथ चलने को
घरौंदा अपनी डाली पर ही बुनने को
सदियों से लम्बे सपनें
एक फूँक मार उड़ा दिए सबने
और हम दोनों जैसे
खुशी के सदमे तले बैठे थे
रात हर कोई सोचता ही रहा
बड़ा अजीब था दिन और शर्मीली शाम थी बहुत
चंद लोगों के मुलाकातों की

या कोई जादू था
किसी ने खुशियों के चूल्हे पर चढ़ाये सपने
ख्वाबों के पतीले को बराबर आंच देकर फूँका
धुआँ आँखों को ना चुभा बल्कि बादल बनकर
उड़ चला बारिशों के गाँव नए
गर्म लजीज़ दावतों की खुशबू का न्यौता लेकर
मन के जुगनू आँखों के बाहर उड़ आये थे
तुम थे सामने
और धडकनें जुबां पे अटकी थी
मैं जैसे एक पल बादल पर दूजे ज़मीन तले
शर्म से उड़ती जाती थी गड़ती जाती थी
बातें सबकी अगरबत्ती सी धुआं-धुआं होकर
दिल के दिल महकाती जाती थी
महक उठे थे अचानक रिश्ते
पल मुबारक हो चले आये थे
वो जब गाँठ लग गयी थी
तुड़ने को नहीं जुड़ने को
जब फेरों संग साथ-साथ चलने को
घरौंदा अपनी डाली पर ही बुनने को
सदियों से लम्बे सपनें
एक फूँक मार उड़ा दिए सबने
और हम दोनों जैसे
खुशी के सदमे तले बैठे थे
रात हर कोई सोचता ही रहा
बड़ा अजीब था दिन और शर्मीली शाम थी बहुत
चंद लोगों के मुलाकातों की

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